Let the pages of this diary take you through the deep and beautiful corridors of the Musical Poet's heart, mind and beyond...
Sunday, September 14, 2025
कर्मफल और उम्मीद का आशियां (Karma Phal aur Umeed ka Ashiyaan)
Wednesday, August 13, 2025
जिसके पास तुम हो (Jiske Paas Tum Ho)
Tuesday, August 5, 2025
फिर से छूना है वो मुकाम Phir Se Chhuna Hai Wo Mukam
Saturday, August 2, 2025
ज़िंदगी के किस्से Jindagi Ke Kisse
Monday, June 16, 2025
अब और नहीं तुझे सोना है Ab Aur Nahi Tujhe Sona Hai
Friday, March 21, 2025
साहिल से समंदर तक (Sahil se Samandar tak)
Sunday, August 18, 2024
मुक्ति दीजिए प्रभु Mukti Dijiye Prabhu
Sunday, August 11, 2024
संभव नहीं Somethings are not possible
Thursday, July 25, 2024
चुल्लू भर पानी की खोज - Stupid search for a puddle
Thursday, March 7, 2024
जाने अंजाने में – Knowingly and Unknowingly
जाने अंजाने में
बहुत से जीवन को
चोट पहुंचाता हूं,
इसीलिए माफ़ी मांगता हूं मैं।
जाने अंजाने में
बहुत से प्राणी
मेरे जीवन को समृद्ध करते हैं,
इसीलिए शीष झुकाता हूं मैं।
जाने अंजाने में
कितने ही क्षण
जीवन की सीख दे जाते हैं,
इसीलिए (ख़ुद को) धन्य मानता हूं मैं।
जाने अंजाने में
सुख, दुख, हंसना व
रोने के बीच डोलता रहता हूं,
इसीलिए मां तुझे याद करता हूं मैं।
जाने अंजाने में
सूखे तपते अधरों में प्यार–परवाह की
शीतल बूंदों की आस लिए बैठता हूं,
इसीलिए दुआ मांगता हूं मैं।
जाने अंजाने में
मटमैले पानी में साफ समझ की
धारा का स्पर्श पाता हूं,
इसीलिए नमन करता हूं मैं।
जाने अंजाने में
तेरे रहम के कलम की
लिखाई को पढ़ पाता हूं,
इसीलिए फिक्र को त्याग पाता हूं मैं।
जाने अंजाने में
अनंत अस्तित्व की झलक में
अपना स्थान समझ पाता हूं,
इसीलिए ख़ुद को अर्पण करता हूं मैं।
– नयन
दोपहर 11:40,
बृहस्पतिवार, 7 मार्च 2024
पटना