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Thursday, July 20, 2023

होश, आज़ादी और कोशिशें - Of Strifes And Strivings


आज़ाद हूं आज भी शायद
दर्द की ज़ुबान को सुनने को,
पर ख़ुद को मैं पाक रखूं,
इसी चाहत को लेकर चला हूं।

करने को वे करेंगे बहुत कुछ,
कहने को वे कहेंगे बहुत कुछ,
पर बेदाग रहूं भीतर से मैं,
इसी कोशिश के साथ खड़ा हूं।

होश में रहूं, सचेत रहूं,
पल पल धड़कनों को और 
सांसों को जानू, ताकि
मुख से निकले कुछ न बासी।

सीमित सोच व बीमार बुद्धि
से कैसे हो अब समाज की शुद्धि?
मन के हैवान को बदल, ताकि
भूल से भी न होएं उसकी दासी।

- नयन,
रात 11:22 बजे, 20 जुलाई 2023
पटना