Nayan | WritersCafe.org

Saturday, December 20, 2014

Arise! Arise! Great Ones!

Arise! Arise! Great Ones!















The world, alas, stands on the shoulders of braves,
who withered carrying its burden,
for tortured minds, of tormented souls,
and stood for the cause that mattered
all humanity and all humankind.
Of love, mutual respect, values,
understanding, friendship and virtues,
for peace, knowledge and truth,
so that people can wake up and see
the path they took, and 
the path they should take !
Arise O great race of the Gods!
Arise O daughters and sons of the Divine!
Haven't the sacrifices of these brave prophets enough?
Enough to quench your thirst of darkness, dread and death?
Come on, you can be better!
Arise! Arise! Great Ones!
-Nayan
10:15 am, 20th Dec 2014,
Malaysian Township, Hyd



Wednesday, December 17, 2014

in haewanon ko kya maloom

इन हैवानो को क्या मालूम























इन हैवानो को क्या मालूम
कहाँ खुदा का नूर है,
बेलगाम बेदर्दों ने किया
मासूम मुस्कानों को चूर है !

बदले की आग में जलने वाले
इन आतंकियों का यह कैसा जुनून ?
मासूम अंजान बच्चों का ये
कैसे? कैसे किया खून है ?

बदले की भावना का जवाब इनका,
बेहिचक बस सफ़ेद झूठ है !
सर-आँखों में गोली क्यों मारी ?
(गया) हौसला –भरोसा आज टूट है !

इन हैवानो का दिल न पसीजा ?
लज्जा न आई बेदर्दों को तब ?
(मासूम,) गोलियों से अंजान नन्हें जानों को,
नज़दीक से मारा सरों में जब !

पर्वतेगार का कैसे खाते हैं कसम ?
जिनका नाम ही है रहमोकरम !
दहशतगर्दों का न कोई कौम,
क़त्ल-ए-शौकीन ये रक्त-ए-हरम !

हमारे हौसलों को आज यहाँ
उठकर सामना करना होगा,
कूटनीति को तक पे रख
एक-साथ होकर आना होगा !

ज़हर हर जगह है जानलेवा,
आज यह ज़हन में लायें हम !
इंसानी जान है कीमती बहुत,
आयें (इसकी) हिफाज़त का भरे (हम) दम !

हुकूमतें आज समझ कर देखें,
लोगों की सच्ची ज़रूरतें हैं क्या !
लालच-बदले को दरकिनार कर,
इंसानियत को मौका दो भैया !

बस बहुत हो चूका मौत का माहौल,
दिलों के तार को जोड़ें अब हम !
नहीं चाहिए खौफ व दहशत,
आज हम सभी की हैं आँखें नम !

नयन
11:35 pm, 15th Dec 2014
Malaysia Township, Hyd

(pained at the massacre of innocent children at a School in Pakistan)


Bhaskar Jyoti Ghosh [Google+, FB]

Friday, October 24, 2014

The fool that I am



I think about tomorrow, and lo!
The today seeps between my fingers.
I think about life, and lo!
Life slips away without my notice.
I hover over yesterday, and lo!
My life comes to an end.
I think of doing things I love, and lo!
Time passes by, and I do not realize.
I am such a fool, thinking that I shall not be!
But I keep on thinking, and still remain a fool,

when the parting call is made, and I have to go!

9 am, Friday, 24th Oct 2014
Hyderabad


© Bhaskar Jyoti Ghosh [Google+FB]

Thursday, August 7, 2014

Nirbhaya











(image source: http://simc-wire.com/16th-dec-delhi-gang-rape-case-long-awaited-final-verdict-arrives/)


क्यों कमज़ोर पड़े वो नारी ?
पीड़िता को दोष दे क्यों समाज है हारी ?
क्यों दर्द व दंश से रोए वो महिला ?
क्यों समाज स विक्षिदित कहलाए वो अबला ?

खुली हवा में तैरना सिर्फ मनसा न था,
यह उसकी स्वतंत्रता का अस्तित्व था।
जिसने अतिक्रमण किया उसके इस अधिकार का,
क्यों वह अदंडित रहे, और
क्यों वह अभागिन कहलाए ?
क्यों कहलाए वह ही पतिता ?

क्यों आततायी मुक्त रहे
प्रपंच के परिणाम से ?
क्यों औरत ही सिर्फ भुगते
अवहेलना और लांछन से ?
क्यों मरे वह ही शर्म से
जिसने न किया कोई दोष हो ?
क्यों पापी को अभय मुक्ति दे
समाज को उसपर न रोष हो ?

विक्षिप्त सोंच, बंद बुद्धि से ,
कहीं खो चुका समाज का संतुलन।
कौन रक्षे पथ आत्मविनाश से -
ले चेतना पथ पर संवेदनशील मन ?

दूरदर्शी हैं जो वीर-वीरांगनाएँ ,
बलिदान वहीं तो करते हैं !
स्वार्थी और सीमित हैं जो ,
पश्चात, आत्मग्लानि से मरते हैं !

तो उठो हे नारी!
गठन करो स्वतंत्र युग का,
बन प्रत्येक आत्माधिकारी,
धरो रूप दशभुजा दुर्गा!

धरो कर में स्वतंत्र इच्छा,
करो मन में स्वनिर्भर चिंता,
परिवर्तन प्रदर्शित करो जग में,
अभया रक्षित बनो निर्भया!

नयन
11:34 am, Sun, 13th July’14
Malaysian Township,
Hyderabad, India

© Bhaskar Jyoti Ghosh [Google+, FB]